अध्याय 1, श्लोक 9 (भगवद् गीता 1.9)

अध्याय 1: अर्जुनविषादयोग

संस्कृत श्लोक

अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः। नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः

लिप्यंतरण

anye cha bahavaḥ śhūrā madarthe tyaktajīvitāḥ nānā-śhastra-praharaṇāḥ sarve yuddha-viśhāradāḥ

शब्दार्थ

anye—others; cha—also; bahavaḥ—many; śhūrāḥ—heroic warriors; mat-arthe—for my sake; tyakta-jīvitāḥ—prepared to lay down their lives; nānā-śhastra-praharaṇāḥ—equipped with various kinds of weapons; sarve—all; yuddha-viśhāradāḥ—skilled in the art of warfare

अनुवाद

मेरे लिए प्राण त्याग करने के लिए तैयार, अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित तथा युद्ध में कुशल और भी अनेक शूर वीर हैं।

अर्थ एवं व्याख्या

यह श्लोक अहंकारी नेतृत्व की उस मनोवैज्ञानिक स्थिति को दर्शाता है जहाँ व्यक्ति अपनी सत्ता को सुरक्षित करने के लिए दूसरों के बलिदान पर निर्भर रहता है। यह बाहरी साधनों और समर्थकों पर अत्यधिक आश्रित होने की मोहग्रस्त मानसिकता को उजागर करता है, जो अंततः विनाशकारी आसक्ति का प्रतीक है।

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